23 मार्च 1931 भारतीय इतिहास का वह दिन है जब भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने देश के लिए हंसते-हंसते अपने प्राण न्योछावर कर दिए। इन क्रांतिकारियों के व्यक्तित्व को गढ़ने में काशी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। बनारस उस समय क्रांतिकारी गतिविधियों का केंद्र था, जहां शचीन्द्र नाथ सान्याल जैसे नेताओं के मार्गदर्शन में भगत सिंह सक्रिय रहे। राजगुरु ने भी बनारस में शिक्षा लेकर क्रांतिकारी विचारधारा अपनाई। वहीं सुखदेव और भगत सिंह की दोस्ती लाहौर से शुरू होकर देशभक्ति के सफर में मजबूत हुई। काशी में इनकी कई गुप्त बैठकें हुईं, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी।