1978 में जब जयपुर रग्स की शुरुआत हुई थी तब इसके संस्थापक नंद किशोर चौधरी ने सोचा भी नहीं होगा कि ग्रेजुएशन के बाद अपने पिता से पांच हजार रुपये उधार लेकर इस कारोबार की शुरआत करने के बाद, आज यह 750 करोड़ रुपये से ऊपर टर्नओवर वाला एक विशाल ग्रुप बन जायेगा. आज क़रीब 75 से अधिक देशों में इनके कार्पेट एक्सपोर्ट किए जा रहे हैं. इटली, रूस (फ्रेंचाइजी), चीन जैसे दूसरे देशों के अलावा भारत के बड़े शहर जैसे मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, जयपुर, अहमदाबाद, कानपुर एवं हैदराबाद में जयपुर रग्स के स्टोर्स हैं. आज इस कंपनी में दुनिया के शीर्ष डिजाइनर्स के साथ मिलकर डिजाइन तैयार किए जाते हैं. कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक नंद किशोर चौधरी के अनुसार, उद्यमिता की यह पूरी यात्रा अदम्य इच्छाशक्ति, प्रेम, करुणा एवं धैर्य की कहानियों से भरी पड़ी है. उनका मानना है कि हम तब तक सफल उद्यमी नहीं बन सकते, जब तक कि हम असफलता का सामना करने के लिए तैयार न हों. उन्होंने अपने पिता के पारंपरिक जूते के व्यवसाय को छोड़कर कालीन का बिजनेस शुरू करने का प्रयास किया, यही नहीं नंद किशोर चौधरी ने अपने सपने को साकार करने के लिए एक सरकारी बैंक में नौकरी भी की. जब नंद किशोर चौधरी ने पहली बार अपनी कंपनी के लिए कारीगरों की भर्ती शुरू की तो, उन्हें कई प्रतिरोध का सामना करना पड़ा क्योंकि महिलाओं को कार्य करने की अनुमति नहीं थी. नंदकिशोर चौधरी ने कालीन उद्योग के विकास को इस प्रकार तैयार किया है कि उस में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. वीडियो में जानिए कालीन और कर्मठता की इस दिलचस्प दास्तान के बारे में.