स्टैच्यु ऑफ लिबर्टी सिर्फ एक मूर्ति नहीं, बल्कि आज़ादी और लोकतंत्र की पहचान है. अमेरिका के न्यूयॉर्क में खड़ी यह ऐतिहासिक धरोहर फ्रांस ने 1886 में अमेरिका को गिफ्ट के तौर पर दी थी. वजह थी—दोनों देशों का समान लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास. लेकिन अब, करीब 140 साल बाद, फ्रांस में इस पर नई बहस छिड़ गई है. सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका अब भी इस तोहफे के काबिल है? यह बहस तब तेज हुई जब यूरोपीय संसद के सदस्य और फ्रांस की वामपंथी पार्टी के सह-अध्यक्ष राफेल ग्लुक्समान ने अमेरिका से स्टैच्यु ऑफ लिबर्टी को वापस लौटाने की मांग कर दी. उनका कहना है कि अमेरिका अब इस ऐतिहासिक धरोहर के काबिल नहीं रह गया है.