मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) के महासचिव सीताराम येचुरी का 13 सितंबर दिन गुरुवार को निधन हो गया, जिससे लेफ्ट की सियासत को गहरा झटका लगा है. इसके साथ ही भारत में किसानों, आदिवासियों, भूमिहीनों और मजदूरों के अधिकारों के लिए लड़ने वाली आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई. येचुरी को देश की राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित करने वाले नेता के तौर पर भी याद किया जाएगा. पार्टी के पूर्व महासचिव हरकिशन सिंह सुरजीत की गठबंधन निर्माण वाली सियासत को आगे बढ़ाने का काम येचुरी ने ही किया था.