धर्मनगरी वाराणसी में गंगा और उसकी सहायक नदी वरुणा के विकराल रूप धारण करने से बाढ़ का भारी संकट पैदा हो गया है. केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा का जलस्तर 70.27 मीटर दर्ज किया गया, जिसने 70.26 मीटर के चेतावनी बिंदु (Warning Level) को पार कर लिया है. दोनों नदियां करीब 30 सेंटीमीटर प्रति 12 घंटे की तेज रफ्तार से बढ़ रही हैं. गंगा के उफान से काशी के सभी 84 पक्के घाट पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं. दशाश्वमेध और अस्सी घाट पर गंगा आरती का स्थान बदलना पड़ा है, जबकि प्रसिद्ध 'सुबहे बनारस' का मंच और यज्ञशाला पानी में समा गई है. मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट डूबने की वजह से शवदाह छतों और संकरी गलियों में करने को मजबूर होना पड़ रहा है. सामनेघाट, पुलकोहना और सलारपुर समेत 10 से अधिक रिहायशी इलाकों में पानी घुसने से 350 परिवारों के करीब 1500 लोग पलायन कर राहत शिविरों में शरण ले चुके हैं. प्रशासन ने सभी बाढ़ चौकियों को अलर्ट पर रखा है और प्रभावितों को भोजन व चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है. TV9 संवाददाता अमित सिंह की ग्राउंड रिपोर्ट.